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आखिरकार मुलक्कल को न्याय मिला, बरी होने की ख़ुशी में समर्थकों ने भंगड़ा डाल किया स्वागत

हुई सच्च की जीतआखिरकार मुलक्कल को न्याय मिला, बरी होने की ख़ुशी में समर्थकों ने भंगड़ा डाल किया स्वागत  

  • सच्चाई और न्याय के लिए न्यायतंत्र का धन्यवाद, परमपिता परमेश्वर ने सच्चाई के लिए अपनी ताकत दिखाई – फादर पीटर 
  • मुलक्कल का बरी होना सच्चाई की जीत – ईसाई भाईचारा

जालंधर, 14 जनवरी (शैली अल्बर्ट): केरल के नन दुष्कर्म मामले में डायोसीज आफ जालंधर के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल को कोट्टायम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने बरी कर दिया है। इसका यहां ईसाई भाईचारे के सदस्यों ने स्वागत किया है।
इस फैसले के बाद जालंधर के बिशप हाउस में पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल के समर्थकों ने ढोल की थाप पर खुशी मनाई। चर्च के गेट के बाहर आतिशबाजी का दौर भी जारी है।
सच्चाई और न्यायतंत्र की जीत- फादर पीटर 
कावमपुरा में बिशप के जन संपर्क अधिकारी फादर पीटर ने कहा कि इसके लिए वह परमपिता परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने सच्चाई के लिए अपनी ताकत दिखाई। पूरे मामले में बिशप मुलल्कल को समर्थन देने वालों का भी धन्यवाद। उन्होंने कहा कि सच्चाई और न्याय के लिए न्यायतंत्र का धन्यवाद। पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी किए जाने का फैसला सच्चाई की जीत है। उन्होंने कहा कि पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने हमेशा मानवता की सेवा की बात की थी। अब अदालत के फैसले ने दूध का दूध तथा पानी का पानी कर दिया है।
नन ने लगाया था यौन शोषण का आरोप- 
फ्रैंको मुलक्कल पर जब केरल की नन ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था तो केरल पुलिस की टीम जालंधर पहुंची थी। दो दिन तक पुलिस लाइन के पास स्थित चर्च में उनसे पूछताछ हुई थी। नन ने उन पर 13 बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। यह घटना जालंधर डायोसीज द्वारा कोट्टायम जिले में संचालित कॉन्वेंट के बिशप के दौरे के दौरान हुई थी। नन ने 28 जून, 2018 को पुलिस में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। मामले में जालंधर के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल आरोपी थे। उन्हें 21 सितंबर, 2018 में गिरफ्तार किया गया था। करीब एक महीने बाद उनकी इस मामले में जमानत मंजूर हो गयी थी। अदालत का फैसला आते ही सिविल लाइंस स्थित बिशप हाउस में ईसाई भाईचारे के लोगों ने ढोल की थाप पर भांगड़ा किया। इसके बाद आतिशबाजी की गयी।
उल्लेखनीय है कि जून 2018 में केरल की नन ने रोमन कैथोलिक के जालंधर डायोसीज के तत्कालीन बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। पुलिस को दिए बयान में नन ने कहा था कि मुलक्कल ने कुराविलंगद के एक गेस्ट हाउस में उससे दुष्कर्म किया था, फिर उसे कई दूसरे राज्यों के गेस्ट हाउस में भी ले जाया गया। उनका लगातार यौन शोषण किया जाता रहा। उसके साथ मई 2014 से सितंबर 2018 के बीच 13 बार दुष्कर्म किया गया। नन ने चर्च प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस में शिकायत की।
जांच के बाद 28 जून 2018 को मुलक्कल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। केरल पुलिस ने फ्रैंको मुलक्कल को जांच के लिए केरल बुलाया। कड़ी पूछताछ के बाद 21 सितंबर 2018 को मुलक्कल को गिरफ्तार कर लिया गया। एक माह जेल में काटने के बाद मुलक्कल को केरल हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उनकी जमानत मंजूर कर ली। इसके तहत पासपोर्ट जमा कराने, केरल से बाहर रहने से लेकर कई तरह की शर्तें लगाई गईं थी।
पूर्व बिशप मुलक्कल पर आरोप लगने के बाद पोप ने उसे जालंधर डायोसीज से हटा दिया था। इस मामले के खिलाफ मुलक्कल उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय भी गये कि उनके खिलाफ लगे आरोप खारिज किए जाएं। उच्च अदालतों ने इसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। इस मामले में सबकी नजर इसलिए अहम थी कि अगर मुलक्कल को सजा होती तो यह इतिहास की पहली बड़ी घटना बन जाती, जिसमें यौन उत्पीड़न के मामले में भारत के कैथोलिक चर्च में किसी बड़े पादरी को सजा होती।

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