बंदूक की नोक पर छीना-झपटी जारी, जालंधर पुलिस के हाथ अब भी खाली
रात 9 बजे महिला को लूटने की कोशिश, लोगों के बाहर आते ही भागे बदमाश
प्रथम न्यूज। जालंधर (ब्यूरो) जालंधर का मकसूदां इलाका और मकसूदां चौक इन दिनों अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। इलाके में लगातार लूट, छीना-झपटी और बंदूक की नोक पर वारदातें होने से लोगों में दहशत का माहौल है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस प्रशासन के नाक के नीचे अपराधी खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी भी बड़ी कार्रवाई में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
गत रात करीब 9 बजे मकसूदां चौक के पास एक महिला को बाइक सवार लुटेरों ने निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो युवक अचानक महिला के पास पहुंचे और उससे पर्स व मोबाइल छीनने का प्रयास करने लगे। महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। भीड़ को आता देख आरोपी मौके से फरार हो गए। गनीमत रही कि महिला किसी बड़े हादसे का शिकार नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मकसूदां क्षेत्र में पिछले कई महीनों से लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। कभी राह चलते लोगों से मोबाइल छीने जा रहे हैं तो कभी महिलाओं और बुजुर्गों को बंदूक दिखाकर लूटा जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस सिर्फ गश्त के दावे करती है, जबकि जमीन पर कोई असर दिखाई नहीं देता। रात होते ही इलाके में असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं और आम जनता भय के साये में जीने को मजबूर है।
इलाके के दुकानदारों और निवासियों ने कहा कि कई बार पुलिस को शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामला शांत कर दिया जाता है। लोगों का आरोप है कि पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली और लापरवाही के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। मकसूदां चौक जैसे व्यस्त इलाके में अगर महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे।
स्थानीय निवासियों ने पुलिस कमिश्नर सीपी धनप्रीत कौर से मांग की है कि मकसूदां इलाके में बढ़ते अपराधों पर तुरंत संज्ञान लिया जाए। लोगों ने क्षेत्र में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाने, संदिग्ध युवकों की जांच करने और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की मांग उठाई है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने सख्त कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी वारदात हो सकती है। फिलहाल जनता में पुलिस प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक पुलिस मूकदर्शक बनी रहेगी।



