📌 जालंधर में ‘बालाजी की चौकी’ कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ा।
📌 पुलिस ने साईं दास स्कूल ग्राउंड में डेकोरेशन और टेंट का काम रुकवाया।
📌 कार्यक्रम में भजन गायक कन्हैया मित्तल के आने की घोषणा की गई थी।
📌 भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।
📌 मंदिर कमेटी ने कहा— अनुमति न मिलने पर सड़क पर होगा कीर्तन।
📌 रमन अरोड़ा ने विरोध जताते हुए अपनी सरकारी सुरक्षा लौटाने का ऐलान किया।
📌 कार्यक्रम को लेकर जालंधर में राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है।
प्रथम न्यूज | जालंधर (ब्यूरो ) जालंधर में धार्मिक आयोजन ‘बालाजी की चौकी’ को लेकर बुधवार रात बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया। श्री कष्ट निवारण बालाजी मंदिर कमेटी की ओर से साईं दास स्कूल ग्राउंड में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम की तैयारियों के बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर टेंट, डेकोरेशन और लाइटिंग का काम रुकवा दिया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल के शामिल होने की घोषणा की गई थी, जिसके चलते श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा था।
पुलिस कार्रवाई की खबर मिलते ही भाजपा नेता शीतल अंगुराल, केडी भंडारी, पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, कांग्रेस नेता राजिंदर बेरी और मंदिर कमेटी के सदस्य मौके पर पहुंच गए। नेताओं और समर्थकों ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजन को जानबूझकर रोका जा रहा है और यह आस्था से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को कार्यक्रम रोकने के बजाय श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
मंदिर कमेटी ने साफ कर दिया है कि कार्यक्रम किसी भी हालत में रद्द नहीं होगा। कमेटी सदस्यों का कहना है कि यदि ग्राउंड के अंदर अनुमति नहीं दी गई तो श्रद्धालु सड़क पर बैठकर बालाजी महाराज का गुणगान करेंगे। गुरुवार सुबह भी साईं दास स्कूल ग्राउंड के बाहर धरना जारी रहा और तनावपूर्ण माहौल के बीच दोबारा डेकोरेशन का काम शुरू कर दिया गया। आयोजन स्थल पर कन्हैया मित्तल के बड़े-बड़े पोस्टर भी लगाए गए हैं। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम तय समय शाम 6:30 बजे ही आयोजित किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रमन अरोड़ा ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए अपनी सरकारी सुरक्षा लौटाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों को रोकना उचित नहीं है। विधायक के इस फैसले के बाद जालंधर की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है, जबकि प्रशासन और आयोजकों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है।

