Homeहिमाचलऊनाघर में बुजुर्ग जरूरी , क्योंकि यह भगवान का रूप है...सीमा

घर में बुजुर्ग जरूरी , क्योंकि यह भगवान का रूप है…सीमा

घर में बुजुर्ग जरूरी , क्योंकि यह भगवान का रूप है…सीमा

बुजुर्गों की भी अजीब है कहानी ना खाने को रोटी बस आंखों में पानी है

विवेक अग्रवाल:

बिटिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सांख्यान ने एक ऐसी महिला बुजुर्ग  को मौत के मुंह से निकला जो शायद दो चार दिनों में इस दुनियां में ही नहीं रहती।घाघस में पिछले कई दिनों से रह रही एक बुजुर्ग महिला जो की अधनंगी अवस्था में वहां पड़ी थी  जिसकी उम्र लगभग 70 से 75 वर्ष होगी । गत शाम जब बिटिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सांख्यान को इस महिला की सुचना मिली तो इन्होने तत्काल एक्सशन लिया और अपनी टीम के साथ घाघस पहुंची और इस महिला को तुरंत जिला अस्पताल में पहुँचाया और उनका उपचार करवाया। बिटिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सांख्यान ने कहा की बुजुर्गों की भी अजीब कहानी है, ना खाने की रोटी, आँखों में बस पानी है,शरीर के हाथों हारे ये मन के जवान है, घर में बुजुर्ग जरूरी है क्योंकि ये भगवान है।
ऐसे सराहनीय कार्यों को देखते हुए गत  दिनों राज्यपाल हिमाचल प्रदेश श्री राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर ने  बिटिया फाउंडेशन संस्था को हिमाचल की सर्वश्रेष्ठ संस्था के पुरस्कार से नवाजा गया। बिटिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सांख्यान ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की “सूरज की तपिश और बेमौसम बरसात को हमने  हंस कर  झेला है , मुसिबतों से भरे दलदल मे हमने अपनी जिंदगी को धँस कर ठेला है, यूँ ही नहीं कदम चुम रही है सफलता आज इस खुले आसमान के तले ज़माने भर के नामों को पीछे छोड़ा है तब जाकर हमारा नाम फैला है ” इस ख़ुशी के मौके पर सीमा सांख्यान ने अपनी पूरी टीम को बधाई का पात्र बताया और कहा की मेरी पूरी टीम ही मेरी ताक़त है इस लिए सभी बधाई के पात्र है।

 

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