Thursday, October 6, 2022

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मिलावट वो जहर हैं जिससे शायद ही कोई अछूता हो- दूध, घी और पनीर की मिलावट की करे पहचान, अपनाए इन आसान उपायो को और जांचे

दूध, घी और पनीर की मिलावट की करे पहचान, अपनाए इन आसान उपायो को और जांचे खुद

माना कि भारत सरकार ने  खाध पदार्थों में मिलावट पर सिकंजा कसने के लिए कई उपाए किये , पर कुछ कर्मचारियों, अधिकारीयों के कारण देश में मिलावट कम होने की बजाये और बढ़ता गया जो आज इंसानों से लेकर जानबरों तक के लिए खतरा बन चूका हैं। इस अदृश्य जहर पर कैसे काबू पाया जाये यह एक प्रश्न सभी के मन में हैं ?

मिलावट वो जहर हैं जो स्वास्थ पर ही घातक असर नहीं करता बल्कि जानवरों से लेकर हमारे आस – पास के पर्यावरण को भी दूषित करता हैं। इस पर काबू पाया जायेगा भी या नहीं, यह भविष्य में सरकार की नीतियों पर निर्भर करता हैं। यहाँ इतना जरूर कहूंगा- कानून बनाने मात्र से उन भयानक आदमखोर मुनाफाखोरों से बचा नहीं जा सकता, जबतक कानून का सख्ती से अमल न हो और जबतक जमीनी स्तर पर लगातार इस पर कार्य न हो ।

बता दें- जहा सरकारों ने मिलावट  को बंद करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया ही नहीं , यदि इसे जघन्य अपराध की श्रेणी में शामिल करते तो शायद इस पर लगभग – लगभग निजात मिल जाता, और मिलावट करने वाला मिलावट करने से पहले सौ बार सोचता। यहाँ सिर्फ सरकार की ही गलती नहीं , यहाँ आम लोगों का भी हाथ हैं , कारीगरों को पता होता हैं कि मिलावट हो रही हैं फिरभी चाँद पैसों के खातिर अपना जमीर बेच देते हैं। दूसरा सबसे बड़ा कारण दुकानदार जो ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट वाली खाध पदार्थों को धड़ल्ले से बेच देते हैं। अगर बाजार इसका विरोध करें और बेचना बंद कर दे तो मिलावट वाली खाध पदार्थ बाजार में कभी नहीं आएगी ।  

जालंधर, 12 अक्टूबर: आजकल कोई स्वस्थ्य रहे तो कैसे रहे, खाने की हर दूसरी चीज़ मे मिलावट हो रही है। लोग क्या खाएं, कहां से लेकर खाएं यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। चलिए 2-3 चीज़ों में मिलावट हो तो समझ में भी आता है, लेकिन आजकल तो मिलावट करने वालों ने कोई भी चीज़ नहीं छोड़ी। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स दे रहे हैं जिनके जरिए आप घर बैठे ही मिलावटी दूध घी और पनीर की पहचान कर सकते हैं।

शुद्ध देशी घी का काला सच जानिये और सचेत रहिए

शुद्ध देसी घी का घिनौना सत्य ;

चमड़ा सिटी के नाम से मशहूर कानपुर में जाजमऊ से गंगा जी के किनारे किनारे 10 -12 किलोमीटर के दायरे में आप घूमने जाओ तो आपको नाक बंद करनी पड़ेगी ।

यहाँ सैंकड़ों की तादात में गंगा किनारे भट्टियां धधक रही होती हैं । इन भट्टियों में जानवरों को काटने के बाद निकली चर्बी को गलाया जाता है। और इस चर्बी से अनेको चीजो का निर्माण किया जाता है… पर जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बनती है वो है “शुध्द देशी घी”

जी हाँ ” शुध्द देशी घी”

यही देशी घी यहाँ थोक मंडियों में 120 से 150 रूपए किलो तक भरपूर बिकता है । इसे बोलचाल की भाषा में “पूजा वाला घी” बोला जाता है ।
इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग भंडारे कराने वाले करते हैं।
लोग 15 किलो वाला टीन खरीद कर मंदिरों में दान करके पूण्य कमा रहे हैं।
इस नकली “शुध्द देशी घी” को आप बिलकुल नही पहचान सकते । बढ़िया रवे दार दिखने वाला ये ज़हर सुगंध में भी एसेंस की मदद से बेजोड़ होता है ।
औधोगिक क्षेत्र में कोने-कोने में फैली वनस्पति घी बनाने वाली फैक्टरियां भी इस ज़हर को बहुतायत में खरीदती हैं ।
गांव देहात शहरों में लोग इसी वनस्पति घी से बने लड्डू विवाह शादियों में मजे से खाते हैं शादियों पार्टियों में इसी से सब्जी का तड़का लगता है। बाजारों में बिकने वाली मिठाईया भी इसी प्रकार के घी से तैयार होती है ।

जो लोग जाने अनजाने खुद को शाकाहारी समझते हैं। जीवनभर मांस अंडा छूते भी नहीं। क्या जाने वो जिस शादी में चटपटी सब्जी का लुत्फ उठा रहे हैं उसमें आपके किसी पड़ोसी पशुपालक के कटड़े (भैंस का नर बच्चा) की ही चर्बी वाया कानपुर आपकी सब्जी तक आ पहुंची हो।
शाकाहारी व व्रत करने वाले जीवन में कितना बच पाते होंगे अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।

अब आप स्वयं सोच लो आप जो वनस्पति घी ” डालडा” “फॉर्च्यून” आदि खाते हो उसमे क्या मिलता होगा।

कोई बड़ी बात नही कि देशी घी बेंचने का दावा करने वाली कम्पनियाँ भी इसे प्रयोग करके अपनी जेब भर रही हैं । इसलिए ये बहस बेमानी है कि कौन घी को कितने में बेच रहा है।

अगर शुध्द घी ही खाना है तो अपने घर में देसी गाय पाल कर ही आप शुध्द खा सकते हो या विश्वसनीय गोशालाओ में निर्मित देसी गोमाता का घी ले सकते है।

ऐसे करें जांच-

  1. देसी घी की पहचान के लिए हाथ को उल्टा करके रगड़ें। अगर घी में दाने आएं तो समझ जाएं यह नकली है।
  2. असली घी हाथ पर लगाते ही समाहित हो जाता है। यही पहचान का सबसे आसान तरीका है।
  3. एक चम्मच घी में चार-पांच बूंदें आयोडीन की मिलाएं। अगर रंग नीला हो जाता है तो घी के अंदर उबले आलू की मिलावट है।
  4. एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें डालडा की मिलावट है।
  5. थोड़ा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें, अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है।

मिलावटी दूध की पहचान-

  1. सिंथेटिक दूध की पहचान करने के लिए उसे सूंघे। अगर उसमें साबुन जैसी गंध आती है तो इसका मतलब है कि दूध सिंथेटिक है जबकि असली दूध में कुछ खास गंध नहीं आती है।
  2. असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है।
  3. असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता,जबकि नकली दूध कुछ वक्त के बाद पीला पड़ने लगता है।अगर हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है।
  4. असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। वहीं, नकली दूध को अगर आप अपने हाथों के बीच रगड़ेंगे तो आपको डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी।
  5. दूध में पानी की मिलावट की जांच करने के लिए किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की एक या दो बूंद टपकाकर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है।
  6. वहीं दूध में डिटर्जेंट की मिलावट पहचानने के लिए दूध की 5-10 मिलीग्राम मात्रा किसी कांच की शीशी या टेस्ट-ट्यूब में लेकर जोर-जोर से हिलाने पर यदि झाग बने और देर तक बना रहे तो इसमें डिटर्जेंट मिला है।

पनीर की जांच-

  1. पनीर का एक छोटा-सा टुकड़ा आप हाथ में मसलकर देख सकते हैं। अगर यह टूटकर बिखरने लगे तो समझ लीजिए कि पनीर मिलावटी है क्योंकि इसमें मौजूद -‘स्कीम्ड मिल्ड पाउडर’ ज्यादा दबाव सह नहीं पाता है।
  2. नकली पनीर ज्यादा टाइट होता है। उसका टैक्सचर रबड़ की तरह होता है।
  3. अगर आप पनीर घर लेकर आ चुके हैं तो उसे पानी में उबाल कर ठंडा कर लें। जब ठंडा हो जाए तो उस पर कुछ बूंदें आयोडीन टिंचर की डालें, अगर पनीर का रंग नीला पड़ जाए तो समझ लीजिए कि यह मिलावटी है।
  4. मिलावटी पनीर खाते वक्त रबड़ की तरह खिंचता है।

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