Sunday, October 2, 2022

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हिमाचल प्रदेश में कोरोना काल में निजी स्कूलों की मनमानी एवं रोज़गारोन्मुखी शिक्षा के आभाव के कारण छात्रों का सरकारी स्कूल की तरफ पलायन

बैठक में निर्णय लेते मुख्य मंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री  

शिमला 9 मार्च 2021( वीना पाठक): हिमाचल प्रदेश जब से नए शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिला आरम्भ हुआ है तब से इस कोरोना काल वाले द्वितीय वर्ष में एक नया रुझान सामने आ रहा है। छात्रों के अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में पिछले कई वर्षों के विपरीत इस साल अधिक संख्या में करा रहे हैं। यह भी देखा गया है कि शिक्षा निदेशालय शिमला के कार्यालय में स्थानांतरण प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर के लिए शिक्षा उप निदेशक के यहाँ ताँता लग रहा है। इस तरह के नए रुझान से ना केवल सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी होगी बल्कि छात्रों के बीच पर्याप्त प्रतियोगिता एवं विविधत्ता के कारण शिक्षा के गुणवत्ता में भी सुधार आ सकता है। यह एक सकारात्मक रुझान है क्योंकि वैसे तो हरेक अभिभावक को मालूम है कि किसी भी स्कूल का पाठ्यक्रम NCERT/SCERT द्वारा ही तय होता है।

        रोज़गार उन्मुख शिक्षा सरकार ही तय करती है। इसी के अनुरूप ही नई शिक्षा नीति 2020 को अपनाया गया है। इससे यह भी मालूम भी पड़ रहा है कि अभिभावक अब समझ रहे हैं कि जब सरकार एक तरफ इतने उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर एवं ज़िम्मेवार अध्यापकों को अपने स्कूलों में अध्यापन के लिए रख रही है जिन पर सरकार का अंकुश भी है। तो दूसरी तरफ उनके बच्चों के लिए भी उतना भी मुफीद है। ओर तो ओर हिमाचल सरकार के द्वारा प्रतिभावान बच्चों को पर्याप्त छात्रवृति भी दी जाती है। इससे ना केवल इन होनहार छात्रों का मनोबल ऊँचा होता है बल्कि अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलती है। आखिरकार रोज़गार की असली परीक्षा में उन्हीं होनहार बच्चों को ही चुना जाता है जिन्होंने अच्छी शिक्षा ग्रहण की हो इसमें यह नहीं देखा जाता कि किसने कहाँ से शिक्षा प्राप्त की है।

        निजी स्कूल में शिक्षा प्राप्त करना सरकारी स्कूलों से ऊपर रोज़गार या गुणवत्ता से ऊपर की कोई गारंटी भी तो नहीं है। अस्सी या नव्वे दशक तक के दौर वाली पीढ़ी के अधिकतर लोग सरकारी स्कूलों में ही पढ़ लिख कर आज एक कामयाब जीवन का गुज़र-बसर कर रहें हैं। अन्य शब्दों में कहें तो यह निजी स्कूल एक रोज़गार या गुणवत्ता के लिए अभिभावकों का एक मृगतृष्णा या हमारे समाज द्वारा धारण किया गया अनकही एक फैशन है। सबको मालूम है कि दस जमा दो के बाद सरकारी कॉलेज ही अच्छे होते हैं तभी तो चन्द वर्ष पूर्व हिमाचल सरकार द्वारा स्थापित हिमाचल तकनीकि विश्वविद्यालय हमीरपुर को 08 -04 -2021 को तकनीकि गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम में (टेक्यूप -3 ) की एफिलिएटेड टेक्निकल यूनिवर्सिटी श्रेणी (ATU ) में देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। जबकि दूसरी ओर हिमाचल में दशकों पूर्व स्थापित कई तकनीकि निजी विश्वविद्यालय आजकल फ़र्ज़ी डिग्री मामले में समाचार पत्रों में चर्चा का विषय बने हुए है। इस तरह यह महसूस होता है कि इतने उच्च शिक्षित, पेशेवर और उच्च वेतनमान वाले अध्यापकों की मौजूदगी से सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से कमतर थोड़ी ना हो सकते हैं। बात केवल अनुशासन, नीति निर्माताओं की इच्छा शक्ति, विश्वास और प्रोत्साहन की है। जिसमें अब लग रहा है कि लोगों में कुछ हद तक एक नई ज्योति प्रज्वलित हो रही है।

       अभिभावक संघ शिमला, प्रदेश की लोकप्रिय सरकार से गुज़ारिश करता है कि हमारे प्रदेश ने जिस इच्छा शक्ति से नो वर्क नो पे (No Work No pay), अन्तोदय जैसे कानून बना कर देश में एक अग्रणी राज्य की भूमिका निभाई है उसी तरह की इच्छा शक्ति दिखाते हुए शिक्षा नीति में गहन मंथन करके एक सशक्त एवं अग्रणी शिक्षा कानून लाएं। जिससे ना केवल सरकारी, निजी स्कूलों की शिक्षा के गुणवत्ता स्तर में बढोतरी हो बल्कि अधिक रोज़गारोन्मुखी भी हो। जिससे हमारे प्रदेश की भागीदारी केन्द्रीय नियुक्तियों में विशेषकर संघ लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग में बढ़ोतरी हो सके। साथ ही साथ हमारा यह संघ यह भी अनुरोध करता है कि सरकारी स्कूलों में ढांचागत एवं प्रौद्योगिकी विकास भी आधुनिक शिक्षा के सभी मानदंडों के अनुरूप स्तर उन्नत करें। जिससे अधिक से अधिक अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित हों । ताकि हिमाचल प्रदेश पर्यटन की तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी ना केवल भारत में बल्कि विश्व के मानचित्र में स्थान पा सके। जिससे सचमुच में हम अपना अधिकतम योगदान भारतवर्ष को भविष्य में विश्व गुरु बनाने में दे सकें।

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